“वो, जो अब तक मेरी कल्पना के पार है”
कभी-कभी लगता है, कुछ लोग बनाए ही इसलिए जाते हैं — कि वे हमें यह सिखा सकें कि “खूबसूरती” का मतलब सिर्फ़ देखना नहीं, महसूस करना होता है।
वो शायद कहीं होगी, पर उसकी मौजूदगी का एहसास मुझे उसी तरह घेरता है जैसे ख़ुशबू बिना दिखाई दिए किसी कमरे को भर देती है।
उसकी आँखों में कोई कहानी नहीं होगी, बल्कि समय रुका होगा —
ऐसा समय, जो किसी ने जिया नहीं, बस महसूस किया है।
वो बोलेगी तो शब्द नहीं, तरंगें निकलेंगी —
जिन्हें सुनने के लिए शांति की ज़रूरत होगी, और समझने के लिए धड़कन की।
उसका स्पर्श किसी साधारण एहसास की तरह नहीं होगा,
वो जैसे त्वचा से होकर आत्मा को छू जाएगा —
जहाँ दर्द भी मधुर लगे, और सुकून भी भारी।
वो शायद अमृत न हो, पर उसके स्पर्श में वो असर होगा
जो किसी थके हुए दिल को फिर से धड़कना सिखा दे।
वो हर बात में कोई अर्थ नहीं ढूँढेगी,
क्योंकि वो खुद अर्थ होगी।
उसकी चुप्पी में पूरा एक ब्रह्मांड होगा,
जहाँ सवाल नहीं होंगे — बस उत्तर की प्रतीक्षा में ठहरे हुए एहसास होंगे।
वो जब मुस्कुराएगी, तो शायद कोई और नहीं समझ पाएगा,
पर मैं जान जाऊँगा — कि उस मुस्कान के पीछे एक अधूरी दुआ है
जो अब भी आसमान से ज़मीन तक गिरने की राह ढूँढ रही है।
कभी वो मुझे कुछ नहीं कहेगी,
फिर भी उसकी आँखों में इतना कुछ होगा
कि शब्दों का अस्तित्व खुद शर्मिंदा हो जाएगा।
वो सिर्फ़ मेरी “पत्नी” नहीं होगी —
वो मेरे विचारों की प्रार्थना होगी,
मेरे भीतर के शोर की शांति,
और मेरे अपूर्ण जीवन की एक पूर्ण व्याख्या।
1 टिप्पणियाँ
भाई हमारे सोच से ज्यादा तुम लिख दिए हो हमें ऐसे ही पत्नी चाहिए लेकिन इसका मतलब बहुत ज्यादा हो गया है।but you wrote to my feelings. कलयुग में ऐसी पत्नी मिलना मुश्किल है
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