तसल्ली से पढ़ते तो समझ आते हम, बिना पढ़े कुछ पन्ने पलट दिए तुमने... हर लफ़्ज़ में था द…
मुस्कान बांटूं, पर रो भी लेता हूं, हर दम मज़बूत हूं, पत्थर थोड़ी हूं। तू जो मिले तो ख…
इस दिल ने तुझे बेपनाह चाहा मगर, तेरे हिस्से की कोई तवज्जोह भी नहीं है। तू समझा मुझे इ…
मैं दवा पूछते फिरता था जमाने भर से भर गए जख्म तेरे हाथ लगाने भर से बाद मुद्दत क…
जब से इन आंखों ने उसका जाना देखा है, सच बताऊं तो मैंने एक गुजरा जमाना देखा है। बेशक उस…
"उसकी निगाहों के सामने ये जाम क्या है, यूँ मानो, रोशनी में मशालों का काम क्या है…
एक शख्स को शामिल खुद में करने का इरादा कर बैठे थे, जितनी मोहब्बत बस की थी, हम उससे ज्य…
सर-ए-सहारा मुसाफिर को, सितारा याद रहता है। मैं चलता हूं मुझे चेहरा, तुम्हारा याद रहता …
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