"उसकी निगाहों के सामने ये जाम क्या है,
यूँ मानो, रोशनी में मशालों का काम क्या है।
समझ लो — नशे की झील हैं आँखें उसकी,
उसमें डूबने वालों का अंजाम क्या है।"
"और तुझे छूकर अगर आज मिट जाऊँ मैं,
तो बता, मेरी कब्र का इंतज़ाम क्या है।
जिसके लिए ये ज़ख़्म लिए फिरता हूँ,
वो मिली और पूछा — 'तेरा नाम क्या है?'"
Explanation
Stanza 1
इन पंक्तियों में शायर अपनी महबूबा की आँखों की नशीली ताकत का बखान कर रहा है। वह कहता है कि जब उसकी निगाहें सामने हों, तो शराब जैसी चीज़ बेमायने हो जाती है — जैसे तेज़ रोशनी में मशाल की जरूरत नहीं रहती। उसकी आँखें इतनी गहरी और खतरनाक हैं कि उन्हें झील जैसा बताया गया है, जिसमें जो भी डूबा, उसका कोई अच्छा अंजाम नहीं हुआ।
यहाँ इश्क़ की दीवानगी और खतरे दोनों दिखाए गए हैं।
Stanza 2
इन पंक्तियों में इश्क़ की ऊँचाई और बेवफाई का गहरा दर्द छुपा है। शायर कहता है कि अगर उसे एक बार अपने प्यार को छू लेने का मौका मिल जाए, तो वो खुशी-खुशी मर जाएगा — लेकिन सवाल ये है कि क्या कोई उसकी मौत को समझेगा या उसे दफनाने का भी कोई इंतज़ाम होगा?
और दर्द तब और बढ़ जाता है जब उसी के लिए वो जख़्म खाता रहा, तड़पता रहा — वो लड़की उसे देखकर पहचानती तक नहीं, और सिर्फ इतना पूछती है — “तुम हो कौन?”
यह प्रेम की सबसे गहरी बेबसी और उपेक्षा को दर्शाता है।
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Sweta bhabhiji
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