जब से इन आंखों ने उसका जाना देखा है,

सच बताऊं तो मैंने एक गुजरा जमाना देखा है।

बेशक उसकी यादों की बारिश होती होगी,

 मैने ख़्वाबों में इक चेहरा पुराना देखा है।


जब भी उसे देखने की ख्वाहिश जागी है,

मैंने ढलता सूरज और चमकता सितारा देखा है।

अब जिसने भी ना देखी तेरी आँखों की गहराई 

उसने फिर क्या खाक समंदर और किनारा देखा है।


अंधेरों से अब डरना हम छोड़ चुके हैं,

अपने ही सीने में जलता तहख़ाना देखा है।

कभी किया था मैंने भी इज़हार-ए-मोहब्बत,

उसने हँस के पूछा — "तूने आईना देखा है?"


Explanation 

Stanza 1

इस stanza में शायर अपने दिल की हालत बयान करता है - जबसे उसने उस शख्स को खोया है , तब से उसकी ज़िंदगी जैसे थम सी गई है। अब हर चीज़ में उसे वो पुराना वक़्त याद आता है, जब वो पास था। यादों की "बारिश" एक भावनात्मक प्रतीक है - जिससे तात्पर्य है कि उस इंसान की यादें आज भी दिल में गहराई से उतरती हैं। शायर के "ख़्वाबों" में आज भी उसी चेहरे की झलक आती है - यानी वह मोहब्बत अब भी जिंदा है, बस रूप बदल गया है।


Stanza 2

यह पंक्तियां प्रतीकों और उपमाओं से भरा है। शायर कहता है कि जब भी उसे फिर से देखने की तड़प हुई, उसने दो विपरीत चीजें एक साथ देखीं ढलता हुआ सूरज (जो अंत का संकेत है) और चमकता सितारा (जो उम्मीद या आरंभ का प्रतीक है)। यानी जुदाई और आशा दोनों की अनुभूति एक साथ हुई।


Stanza 3

इस stanza में दर्द का रंग गहरा हो जाता है। शायर कहता है कि अब वो अंधेरों (तकलीफ़ों, अकेलेपन) से डरता नहीं, क्योंकि उसने अपने दिल में ही एक "तहख़ाना" देखा है - यानी दिल में ऐसी आग या घुटन है जो अंधेरे से भी ज़्यादा डरावनी है।

आख़िरी दो पंक्तियाँ बहुत मारक और भावुक हैं - जब उसने मोहब्बत का इज़हार किया, तो सामने वाले ने मज़ाक उड़ाया और पूछा - "तूने आईना देखा है?" यह एक बहुत तीखा ताना है- जिसमें वह व्यक्ति कहता है कि तू अपने आप को देख पहले, क्या तू मेरे लायक है?