मुस्कान बांटूं, पर रो भी लेता हूं,

हर दम मज़बूत हूं, पत्थर थोड़ी हूं।

तू जो मिले तो खुदा से कम क्या है,

दुआओं का सौदा, मैं मंदिर थोड़ी हूं।


हर बात में तौलें न मुझे औकात से,

कद से बड़ा हूं, मैं नंबर थोड़ी हूं।

जिस दिल ने मोहब्बत सहेजी है चुपचाप,

वो हर किसी का अख़बार थोड़ी हूं।


ख्याल रखता हूं दिलों का 

 दिल तोड़ दूं मैं वैसा थोड़ी हूं 

एक तुझे पसंद हूं बहुत है मेरे लिए

 सब मुझ पर मारे मैं पैसा थोड़ी हूं


                          Explanation 

Stanza 1

इसमें में जो भावनाएं पिरोई गई हैं, वे बहुत सूक्ष्म और गहरी हैं। कवि अपने भीतर के संघर्ष, आत्म-सम्मान और सच्ची मोहब्बत की भावना को बड़े सहज पर असरदार अंदाज़ में व्यक्त करता है। पहली पंक्तियों में वो मुस्कुराने वाले चेहरे के पीछे छिपे दर्द को उजागर करता है। वह कहता है कि वो सबको हंसी बांटता है, लेकिन खुद भी रोता है — यानी वह कोई पत्थर नहीं है जो सिर्फ मजबूत दिखाई दे, उसके अंदर भी जज़्बात हैं। इसी के साथ वो ये भी जताता है कि अगर उसे कोई प्रिय मिल जाए तो वो खुदा जैसा होता है, मगर वो खुद कोई पूजा की जगह नहीं जहां हर कोई आकर दुआएं मांगता रहे — यानी वह भी किसी लेन-देन या अपेक्षा का माध्यम नहीं है, उसकी मोहब्बत एकदम पवित्र है, स्वाभाविक है।


Stanza 2

दूसरे हिस्से में कवि उस समाज पर प्रश्न उठाता है जो हर किसी को उसकी औकात, नंबर या हैसियत से तौलता है। वह यह कहता है कि वह नंबरों या ऊंच-नीच से बड़ा है, क्योंकि उसकी आत्मा, उसका अनुभव, उसकी संवेदनाएं बहुत ऊपर हैं — जिनका कोई माप नहीं। फिर वह प्रेम के उस रूप को सामने लाता है जो दिखावे से परे होता है। उसकी मोहब्बत अख़बार नहीं है जो हर किसी को दिखाई दे या पढ़ाई जाए — वो कुछ ऐसा है जो अंदर ही अंदर जीया गया है, बिना शोर के।


Stanza 3 

तीसरे हिस्से में कवि खुद को एक ऐसे व्यक्ति के रूप में सामने लाता है जो दिलों का ख्याल रखता है, ना कि उन्हें तोड़ने वाला है। वह यह नहीं कहता कि वह बहुत खास है, लेकिन वह खुद को इतना समझदार और भावुक मानता है कि किसी का दिल दुखाना उसके स्वभाव में नहीं है। और फिर सबसे सुंदर बात वह कहता है — कि एक तुझे पसंद आना ही मेरे लिए बहुत है, मुझे सबका ध्यान या चाहत नहीं चाहिए। वह खुद को पैसा नहीं मानता, जिसे सब खरीदना चाहें। उसका प्रेम बाजारू नहीं है, वह खुद भी किसी चीज़ की तरह नहीं बिकता।


निष्कर्ष 

इन शेरों में आत्ममूल्य, नज़ाकत, सच्चाई और संवेदना का अद्भुत संगम है। हर पंक्ति एक भावनात्मक परत खोलती है और दिखाती है कि जो इंसान बाहर से शांत, सरल और मज़बूत दिखता है, उसके अंदर कितनी कोमलता, इज्ज़त और मोहब्बत छिपी होती है। यही उसकी सबसे बड़ी खूबसूरती है।