सर-ए-सहारा मुसाफिर को, सितारा याद रहता है।

मैं चलता हूं मुझे चेहरा, तुम्हारा याद रहता है।

तुम्हारा "जर्फ़" है तुमको मोहब्बत भूल जाती है,

हमें तो जिसने भी हंस के पुकार, याद रहता है।


ख़िज़ाँ भी छू गुज़री थी, मगर कुछ कह न पाई थी,

वो पहला गुल, जो तूने खुद सँवारा, याद रहता है।

नज़र में धुंध है अब तक, क़दम डगमग से रहते हैं,

गुज़िश्ता मोड़ पर जो कुछ उजाला, याद रहता है।


हज़ारों ख्वाब छूटे हैं सफ़र की गर्द में लेकिन,

वो एक सच्चा तमन्ना का इशारा, याद रहता है।

हम अपने ज़ख़्म सीते हैं हँसी वालों के लफ़्ज़ों से,

मगर हर बात में तेरा ही दोबारा याद रहता है।


Explanation 

Stanza 1

जब कोई मुसाफ़िर अकेले सफर पर होता है, तो वो छोटे-छोटे सहारे भी नहीं भूलता जैसे दूर का एक सितारा भी उसे उम्मीद लगता है। उसी तरह मैं भी ज़िंदगी के सफ़र में जब अकेला चलता हूँ, तो तुम्हारा चेहरा मेरी राह का सबसे प्यारा सहारा लगता है। तुम्हारा दिल शायद इतना मज़बूत है कि तुम प्यार को भुला सकती हो। लेकिन हम जैसे लोग तो इतने भावुक होते हैं कि अगर कोई थोड़ा भी प्यार से बोल दे, तो वो भी हमेशा याद रहता है। 

Stanza 2

जीवन में पतझड़ जैसे वक़्त (दुख-दर्द) आए, लेकिन वो भी तुम्हारे पहले दिए गए प्यार को मुरझा नहीं पाए। जो पहला एहसास था, जो तुमने अपने हाथों से शुरू किया था, वो आज भी मेरी रूह में जिंदा है। अब हालात ऐसे हैं कि सब धुंधला है, रास्ता साफ़ नहीं दिखता, और आत्मविश्वास भी कमज़ोर हो गया है। लेकिन जो रोशनी कभी बीते वक़्त में तुम्हारे साथ से मिली थी, वही आज भी मन को दिशा देती है।

Stanza 3

सफ़र में कई ख्वाब, कई सपने मिट्टी में मिल गए, जैसे चलती हवा में गर्द उड़ जाती है। लेकिन तुम्हारी तरफ से मिला एक सच्चा इशारा - मोहब्बत या चाहत का - अब भी दिल की गहराई में बसा है। हम अपने दर्द को छिपाने की कोशिश करते हैं, हँसी में ढाल देते हैं, जैसे घावों को हँसते चेहरों से सिलते हों। मगर चाहे कोई भी बात हो, अंत में वही नाम, वही चेहरा यानी "तुम" - बार-बार याद आ ही जाते हो।