मृदु मुस्कान में मौन सा गीत, मन मंथन में मीठी प्रीत। मिलते लम्हे मस्त बहार, माया जैसी …
आख़िरी मुलाक़ात के लिए बुलाया था उसने, मैंने ना जाकर वो बात बचा रखी है। कहने को तो सब …
सौदा" हमारा कभी "बाज़ार" तक नही पहुंचा, "इश्क" था जो कभी &q…
यह उसकी मेहरबानी है कि वो घर में ही सावर्ती है, निकल आए अगर जो महफ़िल में, तो क़त्लेआम…
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