next विविधता मे सकारात्मकता
कक्षा भीतर से किसी विशाल जगत का मानचित्र प्रतीत होता था। हर समूह अपनी राह पर चलता हुआ, पर सबके भीतर एक अनकही कड़ी थी जो हम सबको एक ही धारा में जोड़ती थी।
जब एक जीवविज्ञान की छात्रा जिससे अब तक ठीक से बात नही हुई थी पर जब वो Myocardium अर्थात ‘दिल’ का नाम लेती, तो यूँ लगता मानो जीवन अपने सबसे गुप्त कक्ष का दरवाज़ा खुल रहा हो जहाँ धड़कनों के बीच मनुष्य की आशाएँ, डर और छोटे-छोटे सपने धूप की तरह चमकते रहते हैं। जब वो ‘फेफड़े’ कहती, तो ऐसा प्रतीत होता मानो हवा सिर्फ साँस नहीं, बल्कि युगों से चलती आयी जीवन-यात्रा का इतिहास सुना रही हो जहाँ हर श्वास हमें याद दिलाती है कि जीना मतलब लौट-लौट कर फिर से शुरुआत करना। और जब उसके होंठों पर ‘न्यूरॉन’ आता, तो लगता मनुष्य की सारी यादें, फैसले, घाव और उम्मीदें एक क्षण में एक ही जगह इकट्ठा हो रही हों। मानो दिमाग के भीतर कोई अदृश्य दीपमाला जल रही हो, जिसकी हर रोशनी यह पुकारती है कि हम अनुभवों से बने हैं, और अनुभव ही हमें हर दिन नये जीवन की ओर ढकेलते हैं। "कभी-कभी मैं उसे देखते हुए सोचता की क्या ये सच में विद्यार्थी हैं, या प्रकृति ने स्वयं अपने रहस्य इसको ही सौंप दिए हैं? उसकी आँखों में एक अलग ही चमक होती थी। जैसे वे किसी प्राणी शरीर नहीं, जीवन को स्पर्श कर रही हों। उसकी बातें सुनकर लगता,“जीवन सिर्फ जीने की चीज़ नहीं है, समझने की चीज़ भी है।”
कॉमर्स वालों की दुनिया गणनाओं तक सीमित नहीं थी। उनके द्वारा हल किए जाने वाले प्रश्नों में जैसे समय, समाज और भविष्य की नब्ज़ धड़कती थी। वे लागत, लाभ और संतुलन.. इन सबके बारे में बातें करते हुए किसी दार्शनिक की तरह लगते थे जो जीवन के असंतुलन को समझकर उसे स्थिर करने का उपाय खोज रहा हो। उनके भीतर एक अलग ही परिपक्वता थी- जैसे यह समझ कि दुनिया का हर निर्णय केवल भावनाओं से नहीं चलता, कुछ निर्णयों को जमीन की सच्चाई चाहिए होती है। मैं उन्हें देखकर अक्सर सोचता! “व्यवहारिकता भी एक कला है, और ये छात्र उसी कला के साधक हैं।”
Arts वाले तो किसी हवा के झोंके जैसे थे। कभी स्थिर नहीं, पर हर जगह अपनी छाप छोड़ते हुए। वे रंगों, इतिहास, मानव स्वभाव, कल्पना और भावनाओं पर ऐसी बातें करते जैसे दुनिया उनकी उंगलियों पर नृत्य कर रही हो। उनके भीतर एक स्वतन्त्रता थी। जैसे किसी पक्षी के भीतर आसमान की गंध होती है। कभी-कभी मैं सोचता, शायद यही लोग हैं जो जीवन के “क्यों” को समझते हैं, जबकि बाकी समूह “कैसे” में उलझे रहते हैं। और इन सबके बीच… मैं इन सबको देखते हुए मेरे भीतर एक विचित्र-सी गर्माहट जन्म लेने लगा, एक ऐसा एहसास जिसे कभी किसी अध्यापक ने नहीं पढ़ाया था।
ऐसा लगता था मानो हर समूह मुझे जीवन का एक अलग श्लोक सुना रहा हो- बायो वाले अस्तित्व का रहस्य, कॉमर्स वाले संतुलन का विज्ञान, Arts वाले मनुष्य की गहराइयों का संगीत। कभी बायो वालों की बातें आत्मा को छू जातीं, कभी Arts वालों की हंसी मन को हल्का कर देती, तो कभी कॉमर्स वालों की तर्कशीलता मुझे जमीन पर खड़ा कर देती।
धीरे-धीरे ऐसा लगने लगा कि “यह कक्षा सिर्फ पढ़ाई का स्थान नहीं है, यह मेरे जीवन का पहला दार्शनिक विश्वविद्यालय है।” यहाँ हर चेहरा एक नया अध्याय था, हर समूह एक नई दिशा,और हर बातचीत अपने भीतर एक ऐसी सीख छिपाए हुए थी जिसे मैं जीवन भर याद रखने वाला था।

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